कुरान - 30:18 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَلَهُ ٱلۡحَمۡدُ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَعَشِيّٗا وَحِينَ تُظۡهِرُونَ

Transliteration: (Wa lahul hamdu fis samaawaati wal ardi wa 'ashiyyanw wa heena tuzhiroon)

और उसी के लिए तमाम तारीफ़ है आसमानों और ज़मीन में [31], और तीसरे पहर (अस्र के वक़्त) [32] और जब तुम पर दोपहर हो (ज़ोहर के वक़्त) [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 18

"और उसी के लिए तमाम तारीफ़ है आसमानों और ज़मीन में [31], और तीसरे पहर (अस्र के वक़्त) [32] और जब तुम पर दोपहर हो (ज़ोहर के वक़्त) [33]।"

[31] क़ायनात में हम्द-ए-इलाही

आसमान और ज़मीन की हर मख़लूक़ अपनी ज़बान-ए-हाल या क़ाल से अल्लाह की हम्द व तस्बीह में मसरूफ़ है। अशरफ़ुल-मख़लूक़ात इंसान का फ़र्ज़ है कि वह सबसे बढ़कर अपने रब की हम्द बयान करे।

[32] अस्र की नमाज़ का वक़्त

तीसरे पहर जब सूरज की धूप ज़र्द पड़ने लगती है, यह अस्र की नमाज़ का मुबारक़ वक़्त है जिसे क़ुरआन में "सलातुल वुस्ता" भी फ़रमाया गया है।

[33] ज़ोहर की नमाज़ और पंज-वक़्ता नमाज़ों की तरफ़ इशारा

दोपहर के ढलने पर ज़ोहर की नमाज़ अदा की जाती है। इन दोनों आयतों (17 और 18) में पांचों वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों (फ़ज्र, ज़ोहर, अस्र, मग़रिब, इशा) के औक़ात की तरफ़ वाज़ेह इशारा मौजूद है।

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