Transliteration: (Fa Subhaanal laahi heena tumsoona wa heena tusbihoon)
"पस अल्लाह की तस्बीह करो जब तुम शाम करो [29] और जब तुम सुबह करो [30];"
शाम का वक़्त जब दिन ढल रहा होता है और रात आ रही होती है, अल्लाह की पाकी और तस्बीह बयान करने का बेहतरीन वक़्त है। मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि इसमें मग़रिब और इशा की नमाज़ें दाख़िल हैं।
सुबह का वक़्त जब रात की तारीकी छंटती है और उजाला फैलता है, इससे मुराद फ़ज्र की नमाज़ और सुबह का ज़िक्र-ओ-अज़कार है। इन औक़ात में अल्लाह की इबादत इंसान को रूहानी क़ुव्वत बख़्शती है।
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