कुरान - 30:17 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
فَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ حِينَ تُمۡسُونَ وَحِينَ تُصۡبِحُونَ

Transliteration: (Fa Subhaanal laahi heena tumsoona wa heena tusbihoon)

पस अल्लाह की तस्बीह करो जब तुम शाम करो [29] और जब तुम सुबह करो [30]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 17

"पस अल्लाह की तस्बीह करो जब तुम शाम करो [29] और जब तुम सुबह करो [30];"

[29] शाम के औक़ात में ज़िक्र-ओ-इबादत

शाम का वक़्त जब दिन ढल रहा होता है और रात आ रही होती है, अल्लाह की पाकी और तस्बीह बयान करने का बेहतरीन वक़्त है। मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि इसमें मग़रिब और इशा की नमाज़ें दाख़िल हैं।

[30] सुबह के वक़्त तस्बीह

सुबह का वक़्त जब रात की तारीकी छंटती है और उजाला फैलता है, इससे मुराद फ़ज्र की नमाज़ और सुबह का ज़िक्र-ओ-अज़कार है। इन औक़ात में अल्लाह की इबादत इंसान को रूहानी क़ुव्वत बख़्शती है।

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