कुरान - 30:20 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنۡ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٖ ثُمَّ إِذَآ أَنتُم بَشَرٞ تَنتَشِرُونَ

Transliteration: (Wa min Aayaatiheee an khalaqakum min turaabin summa izaaa antum basharun tantashiroon)

और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया [37], फिर अचानक तुम इंसान बनकर (ज़मीन में) फैलते जा रहे हो [38]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 20

"और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया [37], फिर अचानक तुम इंसान बनकर (ज़मीन में) फैलते जा रहे हो [38]।"

[37] ख़ाक से इंसानी तख़लीक़

इंसान के बाप हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने बराहे-रास्त मिट्टी से पैदा फ़रमाया। और हर इंसान की ग़िज़ा ज़मीन की मिट्टी से पैदा होती है जिससे नुत्फ़ा बनता है। बेजान बे-क़ीमत ख़ाक से इतना हसीन शाहकार बनाना सिर्फ़ अल्लाह की शान है।

[38] ज़मीन में इंसानों का फैलाव

फिर उस एक जान (आदम) से नस्ल-दर-नस्ल इंसान बढ़ते गए और दुनिया के तमाम गोशों और ख़ित्तों में फैलकर मुल्क और तमद्दुन आबाद कर लिए।

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