कुरान - 30:22 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ خَلۡقُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَٱخۡتِلَٰفُ أَلۡسِنَتِكُمۡ وَأَلۡوَٰنِكُمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّلۡعَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa min Aayaatihee khalqus samaawaati wal aardi wakhtilaafu alsinatikum wa alwaanikum; inna fee zaalika la Aayaatil lil'aalimeen)

और उसकी निशानियों में से है आसमानों और ज़मीन की पैदाइश [43], और तुम्हारी ज़बानों और तुम्हारे रंगों का इख़्तिलाफ़ (फ़र्क़) [44]; बेशक इसमें इल्म रखने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 22

"और उसकी निशानियों में से है आसमानों और ज़मीन की पैदाइश [43], और तुम्हारी ज़बानों और तुम्हारे रंगों का इख़्तिलाफ़ (फ़र्क़) [44]; बेशक इसमें इल्म रखने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं।"

[43] आसमान व ज़मीन का बे-मिसाल निज़ाम

आसमान की बुलंदी, सितारों की गर्दिश और ज़मीन का बिछौना अल्लाह की कुदरत का अज़ीम शाहकार है जिसका पूरा भेद साइंस आज तक नहीं जान सकी।

[44] ज़बानों और रंगों का तनव्वुअ (डाइवर्सिटी)

हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की औलाद होने के बावजूद इंसानों के चेहरों, आवाज़ों, रंगों (गोरे, काले, गंदुमी) और हज़ारों ज़बानों व बोलियों में जो फ़र्क़ रखा गया है, वह अल्लाह की तख़लीक़ी क़ुदरत का मोजिज़ा है। इस्लाम ने इस तमाम रंगारंगी को एक कलिमे और एक क़िबले के तहत मुत्तहिद कर दिया।

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