Transliteration: (Wa min Aayaatiheee an khalaqa lakum min anfusikum azwaajal litaskunooo ilaihaa wa ja'ala bainakum mawad datanw wa rahmah; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yatafakkaroon)
"और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिंस से जोड़े बनाए [39] ताकि तुम उनके पास सुकून हासिल करो [40], और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत [41] और रहमत पैदा कर दी; बेशक इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [42]।"
अल्लाह ने हव्वा अलैहस्सलाम को हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पसली से पैदा फ़रमाया ताकि औरत और मर्द एक ही जिंस और नौअ से हों। अगर जोड़ा किसी दूसरी मख़लूक़ से होता तो वह उल्फ़त और हम-आहंगी पैदा न होती।
मर्द दिन भर की मशक़्क़त और कमाने के बाद जब घर आता है तो अपनी बीवी के पास सुकून और राहत पाता है। यह फ़ितरी तक्सीम है कि मर्द बाहर के काम संभाले और औरत घर के निज़ाम को सुकून का गहवारा बनाए।
निकाह से पहले दोनों एक दूसरे से अजनबी होते हैं, मगर निकाह होते ही अल्लाह दोनों के दिलों में ऐसी बे-मिसाल मोहब्बत और हमदर्दी डाल देता है जो ख़ून के रिश्तों जैसी हो जाती है। यह अल्लाह का बहुत बड़ा एहसान है।
इंसानी जज़्बात, ख़ानदानी निज़ाम और बाहमी मोहब्बत के इस पाकीज़ा बंधन में अल्लाह की हिकमत और क़ुदरत की बे-पनाह निशानियाँ पोशीदा हैं।
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