Transliteration: (Wa min Aayaatihee manaamukum bil laili wannahaari wabtighaaa'ukum min fadlih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yasma'oon)
"और उसकी निशानियों में से है तुम्हारा रात और दिन में सोना, और तुम्हारा उसके फ़ज़्ल (रिज़्क़) की तलाश करना [45]; बेशक इसमें सुनने (और तवज्जो देने) वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [46]।"
रात को सुकून की नींद अता फ़रमाई ताकि जिस्म की थकान दूर हो सके, और दिन को रोज़ी कमाने और मेहनत का वक़्त बनाया। नींद भी अल्लाह की एक अज़ीम नेमत है जिसके बग़ैर इंसान ज़िंदा नहीं रह सकता।
नींद आधी मौत है जिसमें इंसान की हिस्स-ओ-हरकत ख़त्म हो जाती है, और सुबह जागना गोया दोबारा ज़िंदा होना है। जो लोग तवज्जो से सुनते हैं वे रोज़ाना की इस बेदारी से क़यामत के जी उठने का सबक़ लेते हैं।
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