कुरान - 30:23 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ مَنَامُكُم بِٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ وَٱبۡتِغَآؤُكُم مِّن فَضۡلِهِۦٓۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Wa min Aayaatihee manaamukum bil laili wannahaari wabtighaaa'ukum min fadlih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yasma'oon)

और उसकी निशानियों में से है तुम्हारा रात और दिन में सोना, और तुम्हारा उसके फ़ज़्ल (रिज़्क़) की तलाश करना [45]; बेशक इसमें सुनने (और तवज्जो देने) वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [46]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 23

"और उसकी निशानियों में से है तुम्हारा रात और दिन में सोना, और तुम्हारा उसके फ़ज़्ल (रिज़्क़) की तलाश करना [45]; बेशक इसमें सुनने (और तवज्जो देने) वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [46]।"

[45] नींद और मआश का मुतवाज़िन निज़ाम

रात को सुकून की नींद अता फ़रमाई ताकि जिस्म की थकान दूर हो सके, और दिन को रोज़ी कमाने और मेहनत का वक़्त बनाया। नींद भी अल्लाह की एक अज़ीम नेमत है जिसके बग़ैर इंसान ज़िंदा नहीं रह सकता।

[46] नींद मौत की और बेदारी दोबारा जी उठने की मिसाल

नींद आधी मौत है जिसमें इंसान की हिस्स-ओ-हरकत ख़त्म हो जाती है, और सुबह जागना गोया दोबारा ज़िंदा होना है। जो लोग तवज्जो से सुनते हैं वे रोज़ाना की इस बेदारी से क़यामत के जी उठने का सबक़ लेते हैं।

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