Transliteration: (Wa min Aayaatihee an taqoomas samaaa'u wal ardu bi-amrih; summa izaa da'aakum da'watam minal ardi izaaa antum takhrujoon)
"और उसकी निशानियों में से है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं [49]; फिर जब वह तुम्हें ज़मीन से एक बार पुकारेगा [50], तो अचानक तुम (क़ब्रों से) निकल आओगे [51]।"
आसमान बग़ैर सुतूनों के खड़ा है और ज़मीन अपने मदार पर ठहरी हुई है, यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के अम्र और हुक्म का पाबंद है। अगर उसका सहारा न हो तो सारा निज़ाम दरहम-बरहम हो जाए।
क़यामत के दिन जब हज़रत इसराफ़ील अलैहिस्सलाम बैतुल-मुक़द्दस की चट्टान से सूर फूंकेंगे और पुकारेंगे, तो अल्लाह का यह हुक्म ज़मीन की गहराइयों में दफ़्न हर इंसान तक पहुँचेगा।
उस एक पुकार पर हज़ारों साल पहले मरे हुए इंसान, जिनके जिस्म ख़ाक हो चुके थे, आनन-फ़ानन ज़िंदा होकर मैदान-ए-महशर की तरफ़ दौड़ पड़ेंगे।
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