कुरान - 30:27 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَهُوَ ٱلَّذِي يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَهُوَ أَهۡوَنُ عَلَيۡهِۚ وَلَهُ ٱلۡمَثَلُ ٱلۡأَعۡلَىٰ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Wa Huwal lazee yabda'ul khalqa summa yu'eeduhoo wa huwa ahwanu 'alaih; wa lahul masalul a'laa fissamaawaati wal-ard; wa Huwal 'Azeezul Hakeem (section 3))

और वही है जो पैदाइश की इब्तिदा करता है, फिर उसका इआदा करेगा (दोबारा पैदा करेगा) [53], और यह उस पर और भी ज़्यादा आसान है [54]; और उसी की सबसे बुलंद सिफ़त है आसमानों और ज़मीन में [55]; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 27

"और वही है जो पैदाइश की इब्तिदा करता है, फिर उसका इआदा करेगा (दोबारा पैदा करेगा) [53], और यह उस पर और भी ज़्यादा आसान है [54]; और उसी की सबसे बुलंद सिफ़त है आसमानों और ज़मीन में [55]; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है।"

[53] इब्तिदा और इआदा

अल्लाह ने पहली बार इंसान को पैदा किया और वही क़यामत के दिन दोबारा उसे ज़िंदा फ़रमाएगा।

[54] दोबारा बनाना इंसान की समझ में ज़्यादा आसान

अल्लाह के लिए तो कुछ भी मुश्किल नहीं, मगर इंसानी अक़्ल के एतबार से किसी बनी हुई चीज़ को दोबारा जोड़ना पहली बार बनाने से ज़्यादा आसान समझा जाता है। जब उसने पहली बार बना दिया तो दोबारा बनाने में क्या शक हो सकता है?

[55] सबसे आला सिफ़ात

अल्लाह तआला की तमाम सिफ़ात और उसके अस्मा सबसे बुलंद और पाक हैं। उसकी ज़ात हर ऐब, मिस्ल और शरीक से पाक है।

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