Transliteration: (Daraba lakum masalam min anfusikum hal lakum mimmaa malakat aymaanukum min shurakaaa'a fee maa razaqnaakum fa antum feehi sawaaa'un takhaafoonahum kakheefa tikum anfusakum; kazaalika nufassilul Aayaati liqawminy ya'qiloon)
"उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही ज़ात से एक मिसाल बयान फ़रमाई है [56]: क्या तुम्हारे उन ग़ुलामों में से जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं कोई ऐसा है जो हमारे दिए हुए माल में तुम्हारा बराबर का शरीक हो ताकि तुम बराबर हो जाओ [57], और तुम उनसे ऐसा डरते हो जैसा अपनों से डरते हो [58]? इसी तरह हम अक़्लमंद लोगों के लिए निशानियाँ खोल-खोल कर बयान करते हैं।"
अल्लाह तआला मुशरिकीन को उनकी अपनी रोज़मर्रा ज़िंदगी से समझाता है कि तुम अपने ख़रीदे हुए किसी ग़ुलाम या नौकर को अपने पूरे माल व दौलत में बराबर का हिस्सेदार बनाना गवारा नहीं करते।
जब तुम एक मामूली इंसान को अपने माल में शरीक नहीं करते, तो फिर अल्लाह की पैदा की हुई बेजान मूर्तियों और बंदों को अल्लाह की ख़ुदाई और सिफ़ात में बराबर का शरीक कैसे ठहरा लेते हो?
मुशरिकीन अपने बुतों से इस तरह डरते थे कि अगर इनकी पूजा न की तो ये हमें तबाह कर देंगे। क़ुरआन ने इस ख़ौफ़ को बे-बुनियाद क़रार दिया और तौहीद की हक़्क़ानियत वाज़ेह फ़रमाई।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat