कुरान - 30:24 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ يُرِيكُمُ ٱلۡبَرۡقَ خَوۡفٗا وَطَمَعٗا وَيُنَزِّلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَيُحۡيِۦ بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَآۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa min Aayaatihee yureekumul barqa khawfanw wa tama'anw wa yunazzilu minas samaaa'i maaa'an fa yuhyee bihil arda ba'da mawtihaaa inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya'qiloon)

और उसकी निशानियों में से है कि वह तुम्हें ख़ौफ़ और उम्मीद के तौर पर बिजली (की चमक) दिखाता है [47], और आसमान से पानी बरसाता है फिर उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करता है; बेशक इसमें अक़्ल से काम लेने वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [48]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 24

"और उसकी निशानियों में से है कि वह तुम्हें ख़ौफ़ और उम्मीद के तौर पर बिजली (की चमक) दिखाता है [47], और आसमान से पानी बरसाता है फिर उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करता है; बेशक इसमें अक़्ल से काम लेने वाले लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं [48]।"

[47] बिजली की चमक: ख़ौफ़ और उम्मीद का संगम

बादलों में चमकने वाली बिजली एक तरफ़ गिरने और जलाने का ख़ौफ़ पैदा करती है, तो दूसरी तरफ़ रहमत की बारिश और फसलों की शादाबी की उम्मीद जगाती है। अल्लाह के हर हुक्म में जलाल और जमाल दोनों की शान नज़र आती है।

[48] अक़्लमंदों के लिए सबक़

अक़्ल का सही इस्तेमाल यही है कि इंसान कुदरत के इन नज़ारों से अल्लाह की वहदानियत और उसकी क़ुदरत को पहचाने और अपने रब का फ़रमांबरदार बंदा बने।

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