Transliteration: (Li yakfuroo bimaaa aatainaahum; fatamatta'oo fasawfa ta'lamoon)
"ताकि वे उसकी ना-शुक्री करें जो हमने उन्हें अता किया है; पस (दुनिया में चंद रोज़) फ़ायदा उठा लो, अनक़रीब तुम्हें (अपना अंजाम) मालूम हो जाएगा [76]!"
इससे मुराद वे लोग हैं जो अल्लाह से राहत और नेअमतें पाने के बाद भी कुफ़्र और शिर्क की तरफ़ लौट जाते हैं।
उनके इस अमल को ना-शुक्री क़रार दिया गया, क्योंकि वे अल्लाह की नेअमतों से फ़ायदा उठाते हैं लेकिन उसका इंकार करते हैं या उसके साथ दूसरों को शरीक ठहराते हैं।
अल्लाह तआला उन्हें चेतावनी देते हुए फ़रमाता है:
“पस (चंद रोज़) फ़ायदा उठा लो” – यानी दुनिया की आरज़ी लज़्ज़तों से फ़ायदा उठा लो।
लेकिन जान लो कि यह ऐश हमेशा रहने वाला नहीं है, और बहुत जल्द तुम्हें अपने अंजाम का पता चल जाएगा—चाहे दुनिया में अज़ाब के ज़रिए, या आख़िरत में सख़्त मुहासिबे के ज़रिए।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तंबीह है जो अल्लाह की रहमत से नजात पाने के बाद भी ना-शुकरे बन जाते हैं।
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