कुरान - 30:40 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَكُمۡ ثُمَّ رَزَقَكُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡۖ هَلۡ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَفۡعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيۡءٖۚ سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Allaahul lazee khalaqa kum summa razaqakum summa yumeetukum summa yuhyeekum hal min shurakaaa'ikum mai yaf'alu min zaalikum min shai'; Sub haanahoo wa Ta'aalaa 'ammaa yushrikoon (section 4))

अल्लाह ही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें रिज़्क़ दिया [87], फिर वह तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हें ज़िंदा करेगा [88]; क्या तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में कोई ऐसा है जो इनमें से कोई भी काम कर सके [89]? पाक और बहुत बुलंद है वह उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 40

"अल्लाह ही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें रिज़्क़ दिया [87], फिर वह तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हें ज़िंदा करेगा [88]; क्या तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में कोई ऐसा है जो इनमें से कोई भी काम कर सके [89]? पाक और बहुत बुलंद है वह उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं!"

[87] जिस्म और रूह दोनों के लिए अल्लाह का रिज़्क़

अल्लाह ही वह ज़ात है जिसने तुम्हें पैदा फ़रमाया और तुम्हारी रोज़ी का इंतिज़ाम फ़रमाया।
तुम्हारी जिस्मानी ज़िंदगी के लिए उसने खेतों, बाग़ात और अनाज के ज़रिए ज़ाहिरी ग़िज़ा अता फ़रमाई।
और तुम्हारी रूहानी ज़िंदगी के लिए उसने ईमान और तक़वा जैसी बातिनी ग़िज़ा अता फ़रमाई, जो हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के पैग़ाम के ज़रिए मदीना मुनव्वरा की मुक़द्दस सरज़मीन से फूटी।

[88] मौत और दोबारा ज़िंदा होना – एक इलाही निज़ाम

ज़िंदगी देने और रिज़्क़ अता करने के बाद अल्लाह ही मौत देता है।
फिर दूसरे सूर फूंके जाने पर वह तुम्हें दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगा।
यह दुनियावी ज़िंदगी आरज़ी है, नेक और बद आमाल जमा करने के लिए।
और वह दूसरी ज़िंदगी दायमी है, जो जज़ा या सज़ा के लिए मुक़र्रर है। वह रूहानी और हमेशा रहने वाली है, इसीलिए उस ज़िंदगी के बाद मौत का कोई ज़िक्र नहीं।

[89] बातिल माबूदों का रद्

मक्का के मुशरिकीन भी अपने अक़ाइद में यह दावा कभी नहीं करते थे कि उनके बुत पैदा करने, रिज़्क़ देने, मौत देने या दोबारा ज़िंदा करने की ताक़त रखते हैं।
यह आयत अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराने की बे-अक़्ली को बे-नक़ाब करती है, क्योंकि सिर्फ़ अल्लाह ही इन मुतलक़ क़ुदरतों का मालिक है।
पस, अल्लाह बहुत पाक और बुलंद है उन तमाम झूठे शिर्किया अक़ाइद से जो ये लोग गढ़ते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now