कुरान - 30:43 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
فَأَقِمۡ وَجۡهَكَ لِلدِّينِ ٱلۡقَيِّمِ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا مَرَدَّ لَهُۥ مِنَ ٱللَّهِۖ يَوۡمَئِذٖ يَصَّدَّعُونَ

Transliteration: (Fa aqim wajhaka lid deenil qaiyimi min qabli any yaatiya Yawmul laa maradda lahoo minal laahi Yawma'iziny yassadda'oon)

पस आप अपना रुख़ उस सीधे और सच्चे दीन की तरफ़ जमाए रखिए [95], इससे पहले कि अल्लाह की तरफ़ से वह दिन आ जाए जो टाला नहीं जा सकता [96]; उस दिन लोग अलग-अलग (गिरोहों में) फट पड़ेंगे [97]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 43

"पस आप अपना रुख़ उस सीधे और सच्चे दीन की तरफ़ जमाए रखिए [95], इससे पहले कि अल्लाह की तरफ़ से वह दिन आ जाए जो टाला नहीं जा सकता [96]; उस दिन लोग अलग-अलग (गिरोहों में) फट पड़ेंगे [97]।"

[95] सीधे रास्ते पर रुख़ क़ायम रखना

ऐ मुसलमानो! ईमान लाने के बाद पूरी तरह अल्लाह तआला की इबादत के लिए वक़्फ़ हो जाओ। कोई भी मोमिन इस फ़रीज़े से मुस्तस्ना नहीं है।
या इसका मफ़हूम यह भी है: ऐ महबूब! आप अपना रुख़ सीधे दीन की तरफ़ जमाए रखिए ताकि आपकी तवज्जोह से दूसरे लोग भी दीन की तरफ़ खिंचे चले आएं — क्योंकि जिधर आपका रुख़ होता है, उधर ही अल्लाह की रहमत और तमाम मख़लूक़ का रुख़ होता है।

[96] वह दिन जो टाला नहीं जा सकता

इससे मुराद मौत का वक़्त या क़यामत का दिन है, जो अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा दिन है और उसे न टाला जा सकता है और न पीछे हटाया जा सकता है।

[97] जुदाई और फ़र्क़ का दिन

उस दिन तमाम दुनियावी रिश्ते टूट जाएंगे — अज़ीज़ व अक़ारिब एक दूसरे से जुदा हो जाएंगे।
क़यामत के दिन मोमिन, काफ़िर और नेक लोग अपने आमाल और अक़ाइद के एतबार से अलग-अलग गिरोहों में बांट दिए जाएंगे।

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