Transliteration: (Fa aqim wajhaka lid deenil qaiyimi min qabli any yaatiya Yawmul laa maradda lahoo minal laahi Yawma'iziny yassadda'oon)
"पस आप अपना रुख़ उस सीधे और सच्चे दीन की तरफ़ जमाए रखिए [95], इससे पहले कि अल्लाह की तरफ़ से वह दिन आ जाए जो टाला नहीं जा सकता [96]; उस दिन लोग अलग-अलग (गिरोहों में) फट पड़ेंगे [97]।"
ऐ मुसलमानो! ईमान लाने के बाद पूरी तरह अल्लाह तआला की इबादत के लिए वक़्फ़ हो जाओ। कोई भी मोमिन इस फ़रीज़े से मुस्तस्ना नहीं है।
या इसका मफ़हूम यह भी है: ऐ महबूब! आप अपना रुख़ सीधे दीन की तरफ़ जमाए रखिए ताकि आपकी तवज्जोह से दूसरे लोग भी दीन की तरफ़ खिंचे चले आएं — क्योंकि जिधर आपका रुख़ होता है, उधर ही अल्लाह की रहमत और तमाम मख़लूक़ का रुख़ होता है।
इससे मुराद मौत का वक़्त या क़यामत का दिन है, जो अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा दिन है और उसे न टाला जा सकता है और न पीछे हटाया जा सकता है।
उस दिन तमाम दुनियावी रिश्ते टूट जाएंगे — अज़ीज़ व अक़ारिब एक दूसरे से जुदा हो जाएंगे।
क़यामत के दिन मोमिन, काफ़िर और नेक लोग अपने आमाल और अक़ाइद के एतबार से अलग-अलग गिरोहों में बांट दिए जाएंगे।
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