कुरान - 30:44 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
مَن كَفَرَ فَعَلَيۡهِ كُفۡرُهُۥۖ وَمَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا فَلِأَنفُسِهِمۡ يَمۡهَدُونَ

Transliteration: (Man kafara fa'alaihi kufruhoo wa man 'amila saalihan fali anfusihim yamhadoon)

जिसने कुफ़्र किया तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर होगा [98], और जिन्होंने नेक अमल किया तो वे अपनी ही ज़ात के लिए (जन्नत की) राह हमवार कर रहे हैं [99]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 44

"जिसने कुफ़्र किया तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर होगा [98], और जिन्होंने नेक अमल किया तो वे अपनी ही ज़ात के लिए (जन्नत की) राह हमवार कर रहे हैं [99];"

[98] कुफ़्र की ज़ाती ज़िम्मेदारी

इसका मफ़हूम यह है कि हर शख़्स सिर्फ़ अपने कुफ़्र का ख़ुद ज़िम्मेदार होगा; किसी दूसरे पर उसके कुफ़्र का बोझ नहीं डाला जाएगा।
इससे यह बात भी समझ आती है कि काफ़िरों के ना-बालिग़ बच्चों को उनके वालिदैन के कुफ़्र की सज़ा नहीं दी जाएगी।

[99] नेक आमाल का सवाब

यह आयत बताती है कि नेक मोमिनीन को उनके आमाल का पूरा-पूरा बदला ज़रूर मिलेगा। अगर वे अपने आमाल का सवाब दूसरों को ईसाल-ए-सवाब भी करें, तब भी उनके अपने अज्र व सवाब में कोई कमी नहीं आएगी।

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