Transliteration: (Wa min Aayaatiheee anyyursilar riyaaha mubashshi raatinw wa li yuzeeqakum mir rahmatihee wa litajriyal fulku bi amrihee wa litabtaghoo min fadlihee wa la'allakum tashkuroon)
"और उसकी निशानियों में से है कि वह हवाओं को ख़ुशख़बरी बनाकर भेजता है, और ताकि वह तुम्हें अपनी रहमत का मज़ा चखाए [102], और ताकि कश्तियाँ उसके हुक्म से चलें [103], और ताकि तुम उसका फ़ज़्ल तलाश करो, और ताकि तुम शुक्र अदा करो [104]।"
दुनिया की ये नेअमतें और राहतें उस अज़ीम रहमत और सवाब का एक छोटा सा नमूना हैं जो आख़िरत में मिलने वाला है। अल्लाह तआला ने दुनियावी नेअमतों को आने वाली आख़िरत की नेअमतों का एक आरज़ी मज़ा क़रार दिया है।
नुज़ूल-ए-क़ुरआन के दौर में कश्तियाँ और जहाज़ मुवाफ़िक़ हवाओं के सहारे चलते थे, इसीलिए क़ुरआन में बार-बार इसका ज़िक्र आया है। आज भी तूफ़ानी और मुख़ालिफ़ हवाएं बड़े-बड़े जहाज़ों को डुबो सकती हैं, जो यह ज़ाहिर करता है कि बहरी सफ़र की कामयाबी में हवाओं का कितना अहम किरदार है। यह इंसानी ज़रूरतों के लिए क़ुदरती ताक़तों पर अल्लाह के कामिल निज़ाम को साबित करता है।
समंदर में तिजारत और रोज़ी कमाने के लिए इंसान मेहनत और कोशिश करता है, लेकिन इन कोशिशों की कामयाबी पूरी तरह अल्लाह के फ़ज़्ल पर मौक़ूफ़ है। इसलिए अल्लाह की नेअमतों और रोज़ी पर उसका शुक्र अदा करना लाज़िम है। यह आयत सिखाती है कि इंसानी कोशिश ज़रूरी है, मगर असल कामयाबी अल्लाह के करम से होती है।
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