कुरान - 30:48 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
ٱللَّهُ ٱلَّذِي يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ فَتُثِيرُ سَحَابٗا فَيَبۡسُطُهُۥ فِي ٱلسَّمَآءِ كَيۡفَ يَشَآءُ وَيَجۡعَلُهُۥ كِسَفٗا فَتَرَى ٱلۡوَدۡقَ يَخۡرُجُ مِنۡ خِلَٰلِهِۦۖ فَإِذَآ أَصَابَ بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦٓ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ

Transliteration: (Allaahul lazee yursilur riyaaha fatuseeru sahaaban fa yabsutuhoo fis samaaa'i kaifa yashaaa'u wa yaj'aluhoo kisafan fataral wadqa yakhruju min khilaalihee fa izaaa asaaba bihee mai yashaaa'u min 'ibaadiheee izaa hum yastabshiroon)

अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है तो वे बादलों को उठाती हैं, फिर वह आसमान में जिस तरह चाहता है उन्हें फैला देता है [108] और उन्हें टुकड़ों में बांट देता है [109], फिर आप देखते हैं कि उनके दरमियान से बारिश की बूंदें निकलती हैं [110]; फिर जब वह अपने बंदों में से जिन पर चाहता है उसे बरसा देता है, तो अचानक वे ख़ुश हो जाते हैं [111]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 48

"अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है तो वे बादलों को उठाती हैं, फिर वह आसमान में जिस तरह चाहता है उन्हें फैला देता है [108] और उन्हें टुकड़ों में बांट देता है [109], फिर आप देखते हैं कि उनके दरमियान से बारिश की बूंदें निकलती हैं [110]; फिर जब वह अपने बंदों में से जिन पर चाहता है उसे बरसा देता है, तो अचानक वे ख़ुश हो जाते हैं [111];"

[108] हवाओं का चलना और बादलों का फैलना

अल्लाह तआला हवाओं को हुक्म देता है जो समंदरों से बादलों को उठाकर अपनी क़ुदरत व मर्जी के मुताबिक़ आसमान में फैला देती हैं। यह क़ुदरत के निज़ाम पर अल्लाह के मुकम्मल इख़्तियार का इज़हार है।

[109] बादलों का टुकड़ों में बंटना

कभी बादल टुकड़े-टुकड़े होकर मुतफ़र्रिक़ हिस्सों में फैल जाते हैं, लेकिन यह तमाम निज़ाम अल्लाह के हुक्म के ताबे है, जो उसकी तख़लीक़ की हिकमत और तरतीब को दिखाता है।

[110] बारिश का बरसना

फिर इन बादलों के बीच से छलनी की तरह बारिश की बूंदें टपकती हैं, जो मुर्दा ज़मीन को सैराब करती हैं। तेज़ बारिश के बाद बादल कुछ देर ठहरते हैं और फिर ग़ायब हो जाते हैं—यह सब अल्लाह के क़ायम कर्दा निज़ाम का हिस्सा है।

[111] बंदों की मसरूरियत और ख़ुशी

जब अल्लाह अपने बंदों में से जिन पर चाहता है बारिश बरसाता है, तो वे ख़ुश हो जाते हैं क्योंकि बारिश क़हत के ख़ात्मे और रिज़्क़ में इज़ाफ़े की बशारत लाती है। यह इस बात की भी अलामत है कि दुनिया और आख़िरत की तमाम बरकतें हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की ज़ात से जुड़ी हैं, जो सारे जहान के लिए रहमत की बारिश बनकर तशरीफ़ लाए।

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