कुरान - 30:50 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
فَٱنظُرۡ إِلَىٰٓ ءَاثَٰرِ رَحۡمَتِ ٱللَّهِ كَيۡفَ يُحۡيِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَآۚ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Fanzur ilaaa aasaari rahmatil laahi kaifa yuhyil arda ba'da mawtihaa; inna zaalika lamuhyil mawtaa wa Huwa 'alaa kulli shai'in Qadeer)

पस अल्लाह की रहमत के असरात (असरों) को देखिए कि वह किस तरह ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करता है [113]; बेशक वही मुर्दों को ज़िंदा करने वाला है [114]; और वह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 50

"पस अल्लाह की रहमत के असरात (असरों) को देखिए कि वह किस तरह ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करता है [113]; बेशक वही मुर्दों को ज़िंदा करने वाला है [114]; और वह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है।"

[113] ज़मीन का दोबारा ज़िंदा होना

यहाँ "ज़मीन की मौत" से मुराद उसका ख़ुश्क, बंजर और वीरान हो जाना है, जबकि "ज़िंदगी" से मुराद बारिश के बाद उसका लहलहाना और सब्ज़-ओ-शादाब होना है। यह तबदीली ज़मीन की हालत के मुताबिक़ बयान की गई है।

[114] दोबारा ज़िंदा किए जाने की दलील

इस मिसाल से यह साबित होता है कि जिस तरह अल्लाह मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा फ़रमाता है, उसी तरह वह क़यामत के दिन मुर्दों को दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगा। यह अक़्ली और मुशाहिदाती दलील दोबारा जी उठने के अक़ीदे को और मज़बूत करती है।

अल्लाह की क़ुदरत-ए-कामिला

आयत के आख़िर में यह ताकीद की गई कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर-ए-मुतलक़ है, जो तख़लीक़ और दोबारा ज़िंदा करने पर उसके कामिल इख़्तियार की तस्दीक़ करती है।

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