कुरान - 30:49 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَإِن كَانُواْ مِن قَبۡلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيۡهِم مِّن قَبۡلِهِۦ لَمُبۡلِسِينَ

Transliteration: (Wa in kaanoo min qabli any yunazzala 'alaihim min qablihee lamubliseen)

हालाँकि वे उस बारिश के उतरने से पहले बिल्कुल ना-उम्मीद हो रहे थे [112]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 49

"हालाँकि वे उस बारिश के उतरने से पहले बिल्कुल ना-उम्मीद हो रहे थे [112]।"

[112] बारिश से पहले मायूसी की कैफ़ियत

यह आयत बयान करती है कि बारिश आने से पहले लोग सूखे और क़हत के ख़ौफ़ की वजह से शदीद मायूसी का शिकार हो जाते हैं। यह इंसानी फ़ितरत की कमज़ोरी है — वह बहुत जल्द घबरा जाता है और मायूस होने लगता है।

ग़ौर तलब बात यह है कि यह मायूसी सिर्फ़ काफ़िरों तक महदूद नहीं बल्कि आम इंसानों में पाई जाती है, जो राहत आने तक मुस्तक़बिल के ख़ौफ़ में मुब्तला रहने की इंसानी कमज़ोरी को ज़ाहिर करती है।

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