Transliteration: (Wa in kaanoo min qabli any yunazzala 'alaihim min qablihee lamubliseen)
"हालाँकि वे उस बारिश के उतरने से पहले बिल्कुल ना-उम्मीद हो रहे थे [112]।"
यह आयत बयान करती है कि बारिश आने से पहले लोग सूखे और क़हत के ख़ौफ़ की वजह से शदीद मायूसी का शिकार हो जाते हैं। यह इंसानी फ़ितरत की कमज़ोरी है — वह बहुत जल्द घबरा जाता है और मायूस होने लगता है।
ग़ौर तलब बात यह है कि यह मायूसी सिर्फ़ काफ़िरों तक महदूद नहीं बल्कि आम इंसानों में पाई जाती है, जो राहत आने तक मुस्तक़बिल के ख़ौफ़ में मुब्तला रहने की इंसानी कमज़ोरी को ज़ाहिर करती है।
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