कुरान - 30:47 सूरह अर-रूम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوۡمِهِمۡ فَجَآءُوهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَٱنتَقَمۡنَا مِنَ ٱلَّذِينَ أَجۡرَمُواْۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيۡنَا نَصۡرُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaa min qablika Rusulan ilaa qawmihim fajaaa'oohum bil baiyinaati fantaqamnaa minal lazeena ajramoo wa kaana haqqan 'alainaa nasrul mu'mineen)

और बेशक हमने आपसे पहले बहुत से रसूलों को उनकी क़ौमों की तरफ़ भेजा [105], तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए [106], फिर हमने मुजरिमों से बदला लिया; और मोमिनों की मदद करना हमारे ज़िम्मे हक़ (लाज़िम) है [107]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अर-रूम आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अर-रूम तफ़सीर - आयत 47

"और बेशक हमने आपसे पहले बहुत से रसूलों को उनकी क़ौमों की तरफ़ भेजा [105], तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए [106], फिर हमने मुजरिमों से बदला लिया; और मोमिनों की मदद करना हमारे ज़िम्मे हक़ (लाज़िम) है [107]।"

[105] बहुत से रसूलों का भेजा जाना

अल्लाह तआला बयान फ़रमाता है कि उसने हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ से पहले बहुत से रसूलों को उनकी अपनी-अपनी क़ौमों की तरफ़ भेजा। यह तारीख़ भर में इलाही हिदायत के मुसल्सल और आलमगीर सिलसिले को ज़ाहिर करता है।

[106] रसूलों के वाज़ेह मोजिज़ात

ये तमाम रसूल रौशन और खुली निशानियाँ—यानी मोजिज़ात और आसमानी वही—लेकर आए ताकि अपनी सच्चाई को साबित कर सकें और अपनी क़ौमों को सीधे रास्ते की तरफ़ बुला सकें।

[107] इलाही इंतिक़ाम और मोमिनों की नुसरत

वाज़ेह नसीहतों के बाद जब नाफ़रमानों ने रसूलों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उन मुजरिमों से सख़्त बदला लिया। साथ ही, अल्लाह ने अपने करम से यह अपना हक़ और वादा क़रार दिया कि वह साबित-क़दम मोमिनों की ज़रूर मदद फ़रमाएगा। यह बात मोमिनीन को मुख़ालिफ़त और ज़ुल्म के मुक़ाबले में इलाही मदद का पुख़्ता यक़ीन दिलाती है।

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