Transliteration: (Wa Yawma taqoomus Saa'atu yuqsimul mujrimoona maa labisoo ghaira saa'ah; kazaalika kaanoo yu'fakoon)
"और जिस दिन क़यामत क़ायम होगी, मुजरिम लोग क़समें खाएंगे कि वे (दुनिया या क़ब्र में) एक घड़ी के सिवा नहीं ठहरे थे [123]; इसी तरह वे (दुनिया में भी हक़ से) औंधे फिराए जाते थे।"
क़यामत के दिन मुजरिम क़समें खाकर कहेंगे कि वे दुनिया में सिर्फ़ एक घड़ी ठहरे थे। इसके कई मफ़हूम हैं:
आख़िरत की हमेशा रहने वाली ज़िंदगी के मुक़ाबले में दुनियावी मुद्दत वाक़ई एक लम्हे की मानिंद है।
हौलनाक अज़ाब को सामने देखकर गुज़रा हुआ सारा ज़माना बहुत छोटा महसूस होगा।
दुनिया की आरज़ी राहतें आख़िरत की मुसल्सल सख़्तियों के मुक़ाबले में बिल्कुल ना-चीज़ साबित होंगी।
यह आयत दुनियावी लज़्ज़तों पर ग़ुरूर करने से रोकती है, क्योंकि वे झोंके की तरह गुज़र जाती हैं। यह यह भी दिखाती है कि मुजरिम क़यामत के दिन अपनी गुज़री ज़िंदगी की हक़ीक़त समझने में किस क़दर हैरान व परेशान होंगे।
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