कुरान - 42:3 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
كَذَٰلِكَ يُوحِيٓ إِلَيۡكَ وَإِلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ ٱللَّهُ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Kazaalika yooheee ilaika wa ilal lazeena min qablikal laahul 'Azeezul Hakeem)

इसी तरह अल्लाह जो ज़बरदस्त (ग़ालिब), हिकमत वाला है, आपकी तरफ़ और उन (रसूलों) की तरफ़ जो आपसे पहले थे [2] वही फ़रमाता रहा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 3

इसी तरह अल्लाह जो ज़बरदस्त (ग़ालिब), हिकमत वाला है, आपकी तरफ़ और उन (रसूलों) की तरफ़ जो आपसे पहले थे [2] वही फ़रमाता रहा है।

[2] ख़त्म-ए-नबुव्वत और वही-ए-इलाही की यकसानी

इस आयत-ए-करीमा में ख़त्म-ए-नबुव्वत की रौशन दलील है। फ़रमाया गया कि जिस तरह आपसे पहले के अंबिया पर वही नाज़िल की गई, उसी तरह आपकी तरफ़ वही भेजी जाती है। इसके बाद किसी आने वाले नबी का ज़िक्र नहीं फ़रमाया गया, क्योंकि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर नबुव्वत का सिलसिला मुकम्मल और ख़त्म हो चुका है।

हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पिछले नबियों में से हैं, क़यामत के क़रीब उनका दोबारा तशरीफ़ लाना हुज़ूर ﷺ के उम्मती और ख़लीफ़ा की हैसियत से होगा, किसी नए नबी की हैसियत से नहीं। काफ़िरों और अहले किताब को ताज्जुब नहीं करना चाहिए कि मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ पर वही क्यों आई, क्योंकि यह वही रब्बानी का क़दीम सिलसिला है।

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