कुरान - 42:4 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۖ وَهُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡعَظِيمُ

Transliteration: (Lahoo maa fis samaa waati wa maa fil ardi wa Huwal 'Aliyul 'Azeem)

उसी का है [3] जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है; और वही बहुत बुलंद, बहुत अज़ीम (बुज़ुर्ग) है [4]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 4

उसी का है [3] जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है; और वही बहुत बुलंद, बहुत अज़ीम (बुज़ुर्ग) है [4]।

[3] कायनात की हक़ीक़ी मल्कियत

आसमान व ज़मीन की हर चीज़ की हक़ीक़ी मल्कियत और बादशाही सिर्फ़ अल्लाह तआला ही के लिए है। दुनिया में बंदों को जो मल्कियत अता की जाती है वह महदूद, आरज़ी और मजाज़ी है, जबकि हक़ीक़ी मालिक वह कादिर-ए-मुतलक़ है।

[4] बुलंदी और बुज़ुर्गी की सिफ़ात

अल्लाह तआला 'अली' (निहायत बुलंद) और 'अज़ीम' (बेइंतिहा बुज़ुर्ग) है। उसकी ज़ात, सिफ़ात, इल्म और क़ुदरत सब आला व अरफ़ा हैं। साथ ही अल्लाह तआला ने अपने मुक़र्रब बंदों को भी अज़मत अता फ़रमाई है; तमाम मख़्लूक़ात में सबसे अज़ीम मर्तबा हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का है।

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