कुरान - 9:105 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
وَقُلِ ٱعۡمَلُواْ فَسَيَرَى ٱللَّهُ عَمَلَكُمۡ وَرَسُولُهُۥ وَٱلۡمُؤۡمِنُونَۖ وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ,

Transliteration: (Wa qul i'maloo fasayaral laahu 'amalakum wa Rasooluhoo wal mu'minoon; wa saturaddoona ilaa 'Aalimil Ghaibi washshahaadati fa yunabbi'ukum bimaa kuntum ta'maloon)

और कह दो: "तुम काम करो, क्योंकि अल्लाह तुम्हारे काम को देखेगा, और उसका रसूल और मोमिन भी [292] देखेंगे। और तुम ग़ैब और हाज़िर के जानने वाले की तरफ़ लौटाए जाओगे, और वह तुम्हें बता देगा जो तुम करते रहे।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 105 की तफ़्सीर

✅ [292] आमाल हमेशा देखे जाते हैं

यह आयत एक हुक्म और एक चेतावनी दोनों है, जो इंसान को नेक आमाल करने की तरग़ीब देती है, क्योंकि अल्लाह, उसका रसूल ﷺ और मोमिन सब किए जाने वाले काम को देखते हैं। यह सिखाती है कि कोई भी काम छिपा नहीं है, चाहे वह एकांत में ही क्यों न किया जाए।

जैसा नेक बुज़ुर्गों ने फ़रमाया: अगर कोई इंसान बंद कमरे में भी अज़ीमत (वज़ीफ़ा) या नेक काम करे, तो अल्लाह उसे दूसरों पर ज़ाहिर कर देता है (रूहुल बयान)। इसी वजह से नेक बुज़ुर्गों के नेक आमाल उनकी वफ़ात के सदियों बाद भी मनाए और सराहे जाते हैं — यह दिखाता है कि सच्ची सच्चाई और नेकी दुनिया में हमेशा रहने वाला असर छोड़ती है।

इस प्रकार यह आयत इन बातों पर ज़ोर देती है:

  • हर अमल का हिसाब होगा।
  • अल्लाह, नबी ﷺ और नेक लोगों के सामने आमाल ज़ाहिर होंगे।
  • याद रखो कि अल्लाह की तरफ़ लौटने पर हर अमल — ज़ाहिर हो या छिपा — का फ़ैसला होगा।

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