कुरान - 9:1 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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بَرَآءَةٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦٓ إِلَى ٱلَّذِينَ عَٰهَدتُّم مِّنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Baraaa'atum minal laahi wa Rasooliheee ilal lazeena 'aahattum minal mushrikeen)

यह अल्लाह और उसके रसूल की तरफ़ से ऐलान है उन मुशरिकीन से जिनसे आपने (ऐ नबी) समझौता किया था और उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया [1]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 1 की तफ़्सीर

✅ [1] सूरा का नाम और बिस्मिल्लाह का न लिखा जाना

यह आयत सूरा अत-तौबा की शुरुआत है जिसे सूरा बराअत भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुशरिकीन से बराअत (अलाहदगी/बेदख़ली) का ऐलान किया गया है। यह सूरा उन मुशरिकों के बारे में उतरी जिन्होंने अपने अहद (मुआहदा/समझौता) तोड़ दिए थे।

इस सूरा का नाम तौबा भी इसलिए पड़ा क्योंकि इसके आख़िर में हज़रत कअ़्ब इब्न मालिक (रज़ि.) और उनके साथियों की तौबा क़बूल होने का ज़िक्र है।

यह कुरआन की अकेली सूरा है जो बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम से शुरू नहीं होती। वजहें:

  • हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) इस सूरा के साथ बिस्मिल्लाह लेकर नहीं उतरे।
  • हज़रत नबी ﷺ ने इसे लिखवाते वक़्त बिस्मिल्लाह लिखवाने का हुक्म नहीं दिया।
  • हज़रत अली (रज़ि.) ने फ़रमाया कि बिस्मिल्लाह रहमत और अमान की निशानी है, जबकि यह सूरा उन मुशरिकों से अमान और अहद उठाने के लिए नाज़िल हुई थी।
  • हज़रत बरा’ (रज़ि.) के मुताबिक़ यह सूरा आख़िरी दौर में नाज़िल हुई और इसमें मुशरिकों से सभी नाइंसाफ़ी वाले रिश्ते खत्म करने का एलान किया गया।

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