Transliteration: (Baraaa'atum minal laahi wa Rasooliheee ilal lazeena 'aahattum minal mushrikeen)
यह आयत सूरा अत-तौबा की शुरुआत है जिसे सूरा बराअत भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुशरिकीन से बराअत (अलाहदगी/बेदख़ली) का ऐलान किया गया है। यह सूरा उन मुशरिकों के बारे में उतरी जिन्होंने अपने अहद (मुआहदा/समझौता) तोड़ दिए थे।
इस सूरा का नाम तौबा भी इसलिए पड़ा क्योंकि इसके आख़िर में हज़रत कअ़्ब इब्न मालिक (रज़ि.) और उनके साथियों की तौबा क़बूल होने का ज़िक्र है।
यह कुरआन की अकेली सूरा है जो बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम से शुरू नहीं होती। वजहें:
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