Transliteration: (Faseehoo fil ardi arba'ata ashhurinw wa'lamoooannakum ghairu mu'jizil laahi wa annal laaha mukhzil kaafireen)
इस आयत में उन मुशरिकों को चार महीने की मोहलत दी गई जो मुसलमानों से किया हुआ अहद तोड़ चुके थे। इस दौरान वे अरब की सरज़मीं पर बिना किसी ख़ौफ़ के घूम फिर सकते थे।
यह एलान हिजरत के नौवें साल किया गया, यानी फ़त्ह-ए-मक्का के एक साल बाद। उस साल के हज में यह ऐलान खुलेआम किया गया।
आयत के आख़िर में अल्लाह ने फ़रमाया कि कोई उसकी क़ुदरत से बाहर नहीं निकल सकता और आख़िरकार वह काफ़िरों को ज़लील करेगा।
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