कुरान - 9:116 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

116
إِنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۚ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ,

Transliteration: (Innal laaha lahoo mulkus samaawaati wal ardi yuhyee wa yumeet; wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer)

बेशक आसमानों और ज़मीन की बादशाहत अल्लाह ही के लिए है। वही ज़िंदगी देता है और मौत देता है। और अल्लाह के सिवा तुम्हारा न कोई वली है और न मददगार [327]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 116 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 116 की तफ़्सीर

✅ [327] मुकम्मल इख़्तियार अल्लाह के लिए है

यह ख़िताब हक़ पर मबनी है — अल्लाह तआला के सिवा आसमानों और ज़मीन का कोई हक़ीक़ी मालिक नहीं, और न ही उसके सिवा कोई सच्ची मदद है।

मजाज़ी तौर पर कुछ लोग मालिक बन जाते हैं, और अल्लाह तआला के फ़ज़्ल से मददगार भी बन जाते हैं। इसलिए यह आयत उस आयत के ख़िलाफ़ नहीं है:

"तुम्हारा दोस्त अल्लाह के सिवा कोई नहीं, और न उसका रसूल" (सूरा अल-माइदा 5:55)।

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