Transliteration: (Maa kaana li ahlil Madeenati wa man hawlahum minal A'raabi ai yatakhallafoo 'ar-Rasoolil laahi wa laa yarghaboo bi anfusihim 'an nafsih; zaalika bi annahum laa yuseebuhum zama unw wa laa nasabunw wa laa makhmasatun fee sabeelil laahi wa laa yata'oona mawti'ai yagheezul kuffaara wa laa yanaaloona min 'aduwwin nailan illaa kutiba lahum bihee 'amalun saalih; innal laaha laa yudee'u ajral muhsineen)
मदीना के बाशिंदों में मुहाजिरीन और अंसार दोनों शामिल हैं। इससे दो हुक्म निकलते हैं:
यह ग़ज़वा-ए-तबूक के वक़्त की तरफ़ इशारा है, जब मदीना के हर बाशिंदे — चाहे मुहाजिर हो या अंसार — पर नबी करीम ﷺ के साथ सफ़र में शिरकत करना फ़र्ज़ था।
छूट सिर्फ़ उन लोगों को थी जिनके पास जायज़ वजहें थीं — जैसे बुढ़ापा, बीमारी, बचपन, या जब नबी करीम ﷺ ख़ुद किसी को अपना नाइब बनाकर रोक लें। मिसाल के तौर पर हज़रत उस्मान (रज़ि.) ग़ज़वा-ए-बद्र से महरूम रहे, और तबूक में हज़रत अली (रज़ि.) को नबी ﷺ के हुक्म से पीछे रखा गया।
उनके लिए नबी करीम ﷺ के लिए अपनी जान क़ुर्बान करना फ़र्ज़ था, जैसे परवाना शमा पर क़ुर्बान होता है। किसी को भी अपना आराम उनकी हिफ़ाज़त से बढ़कर नहीं समझना चाहिए था।
इसमें जिहाद, रोज़े, हज और इल्म हासिल करने के सफ़र शामिल हैं, मगर इस सियाक़ में साफ़ तौर पर जिहाद मुराद है। अल्लाह की राह में उठाया गया हर कष्ट — प्यास, भूख या थकान — रूहानी तौर पर शुमार होता है।
इससे मुराद फ़ातेह की हैसियत से काफ़िरों के इलाक़े में दाख़िल होना है, जिससे उनके दिल जलते हैं। यह सिखाता है कि जैसे अल्लाह के नेक लोगों को ख़ुश करना इबादत है, वैसे ही उसके दुश्मनों को नाराज़ करना भी सवाब का काम है।
इसमें दुश्मन को ज़ख़्मी करना, उन्हें क़ैद करना, उनका माल-ए-ग़नीमत हासिल करना वग़ैरह शामिल है। ये सब अल्लाह की राह में इबादत माने जाते हैं।
मुस्लिम सिपाही का हर अमल इबादत के तौर पर शुमार होता है। हदीस के मुताबिक़ अल्लाह की रहमत से उम्मीद है कि यही अज्र उन लोगों को भी मिलेगा जो हज या इल्म के लिए सफ़र करते हैं, क्योंकि ये भी अल्लाह की राह के सफ़र हैं।
यह आयत तस्दीक़ करती है कि जिहाद एक बुलंद इबादत है, और जो लोग इसमें शिरकत करते हैं, वे मोमिनों और ग़ैर-मोमिनों दोनों के मुहसिन हैं। उनका अज्र कभी ज़ाया नहीं होता, क्योंकि अल्लाह उसकी राह में की गई हर कोशिश की क़द्र करता है।
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