Transliteration: (Qaatiloohum yu'az zibhumul laahu bi aideekum wa yukhzihim wa yansurkum 'alaihim wa yashfi sudoora qawmim mu 'mineen)
यह आयत मोमिनों को हुक्म देती है कि अहद तोड़ने और जारियत शुरू करने वालों से जंग करें। अल्लाह वादा करता है कि वह:
इतिहास गवाह है कि अल्लाह ने ये वादे नबी ﷺ के ज़माने में पूरे किए — ख़ास तौर पर बद्र, उहुद और हुनैन जैसी जंगों में। ये पूरी हुई पेशीनगोइयाँ नबी करीम ﷺ की सच्चाई और अल्लाही मदद के ज़िंदा मौजिज़े हैं।
आयत का आख़िरी हिस्सा एक गहरा नफ़्सियाती और जज़्बाती वादा है: अल्लाह मोमिनों के दिलों को ठीक करेगा।
इससे यह सबक़ मिलता है:
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