कुरान - 9:15 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
وَيُذۡهِبۡ غَيۡظَ قُلُوبِهِمۡۗ وَيَتُوبُ ٱللَّهُ عَلَىٰ مَن يَشَآءُۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ,

Transliteration: (Wa yuzhib ghaiza quloobihim; wa yatoobullaahu 'alaa mai yashaaa'; wallaahu 'Aleemun Hakeem)

और वह उनके दिलों का ग़ुस्सा दूर करेगा। और अल्लाह जिसे चाहता है उसकी तौबा क़बूल करता है। और अल्लाह जानने वाला, हिकमत वाला है [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 15 की तफ़्सीर

✅ [33] पूर्व दुश्मनों की तौबा से पेशीनगोई का पूरा होना

यह आयत पिछली आयत का सिलसिला जारी रखती है: फतह और अल्लाही इंसाफ़ के ज़रिए न सिर्फ़ काफ़िरों से पहुँचा बाहरी नुक़सान दूर होगा, बल्कि मोमिनों को लगा अंदरूनी दर्द और ग़ुस्सा भी ठंडा और ख़त्म हो जाएगा।

आयत यह भी बताती है कि इस्लाम के कुछ सख़्त दुश्मन भी आख़िरकार तौबा करके ईमान लाएँगे। यह पेशीनगोई मौजिज़ाना तौर पर पूरी हुई, क्योंकि इन नामचीन हस्तियों ने बाद में इस्लाम क़बूल किया:

  • अबू सुफ़ियान
  • इक़रिमा बिन अबू जहल
  • हज़रत अब्बास (रज़ि.)

ये सब पूरी वफ़ादारी से मुसलमान बन गए और नबी ﷺ के मददगार हुए।

यह अल्लाह की उस सिफ़त की याद दिलाता है कि वह जिससे चाहता है तौबा क़बूल करता है, और उसकी क़ुदरत है कि सबसे सख़्त दुश्मनों के दिलों को भी बदल दे। वह लोगों की सच्ची नियतों को जानने वाला है और हिदायत व बख़्शिश में हिकमत वाला है।

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