कुरान - 9:17 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
مَا كَانَ لِلۡمُشۡرِكِينَ أَن يَعۡمُرُواْ مَسَٰجِدَ ٱللَّهِ شَٰهِدِينَ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِم بِٱلۡكُفۡرِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ وَفِي ٱلنَّارِ هُمۡ خَٰلِدُونَ,

अनुवाद -

मुशरिकों का यह हक़ नहीं कि वे अल्लाह की मस्जिदों को आबाद [36] करें, जबकि वे ख़ुद अपने कुफ़्र की गवाही [37] दे रहे हैं। उनके सारे आमाल बर्बाद [38] हो गए, और वे हमेशा जहन्नम की आग में रहेंगे।

सूरह अत-तौबा आयत 17 तफ़सीर


📖 सूरा अत-तौबा – आयत 17 की तफ़्सीर

✅ [36] मस्जिदों से मुशरिकों की रोक

इससे यह सीख मिलती है कि काफ़िरों को मुस्लिम मस्जिदों में इबादत की इजाज़त नहीं, और न मस्जिद से जुड़े कामों के लिए उनसे कोई चंदा क़बूल किया जाए। मस्जिद की तामीर, देखभाल और इबादत — यह सब अल्लाह के घर की हुरमत क़ायम करना है, और यह ज़िम्मेदारी सिर्फ़ मुसलमानों की है।

इसके मुताबिक़:

  • मस्जिद से जुड़े कामों के लिए सिर्फ़ मुसलमानों को रखा जाए।
  • यहूदी नौजवान को मस्जिद झाड़ने की इजाज़त की मिसाल उसके इस्लाम लाने की उम्मीद पर आधारित थी।
  • नजरान के ईसाइयों का मस्जिद-ए-नबवी में इबादत करना नबी ﷺ की साफ़ इजाज़त के बग़ैर था — न रोका गया, न उसे जायज़ ठहराया गया।
  • जब एक बद्दू ने मस्जिद में पेशाब कर दिया, तो नबी ﷺ ने उसे पूरा करने दिया, फिर वह जगह अच्छी तरह धुलवाई — सख़्ती से बेहतर तालीम को तरजीह दी।

✅ [37] मूर्तिपूजा और मस्जिद का वजूद एक साथ नहीं

इसका मतलब है कि शिर्क और मस्जिद की पाकीज़गी एक साथ नहीं जम सकते। उनके आक़ीदे और अमल तौहीद के बिलकुल ख़िलाफ़ हैं, इसलिए मुशरिक मुसलमानों के साथ पाक जगह शेयर नहीं कर सकते।

यह हुक्म सभी काफ़िरों पर लागू है, चाहे वे ज़ाहिरी तौर पर इस्लाम की नक़ल करते हों (जैसे मिर्ज़ाई), या इस्लामी दायरे से बिलकुल बाहर हों (जैसे यहूद और दूसरे)।

✅ [38] काफ़िरों के आमाल बेकार

यहाँ हम सीखते हैं कि काफ़िरों के नेक काम — जैसे मस्जिद की ख़िदमत, मुसाफ़िरख़ाने बनाना या कुँए खोदना — आख़िरत में कोई सवाब नहीं देंगे। उनका कुफ़्र उनके आमाल की आख़िरी क़ीमत को ख़त्म कर देता है।

हालाँकि कुछ काफ़िरों को उनके नेक आमाल की वजह से सज़ा में कमी मिल सकती है। मशहूर मिसाल हज़रत अबू तालिब की है, जिनकी नबी ﷺ के साथ मदद और मेहरबानी की वजह से सज़ा घटाई गई, हालाँकि पूरी तरह माफ़ नहीं हुई।

उनका आख़िरी ठिकाना जहन्नम ही है, लेकिन अल्लाही इंसाफ़ हर अमल का लिहाज़ करता है — चाहे वह अज़ाब घटाने की सूरत में ही हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now