Transliteration: (Innamaa ya'muru masaa jidal laahi man aamana billaahi wal Yawmil Aakhiri wa aqaamas Salaata wa aataz Zakaata wa lam yakhshaa illal laaha fa'asaaa ulaaa'ika ai yakoonoo minal muhtadeen)
"मस्जिदों को आबाद करने" से मुराद उनकी तामीर, सफ़ाई, रोशनी, फ़र्श और आराइश में हिस्सा लेना है।
इससे दो बुनियादी उसूल निकलते हैं:
ये काम नेकी और "इमारत-ए-मस्जिद" का हिस्सा हैं:
तफ़्सीर रूहुल बयान से:
तारीख़ी रिवायात के मुताबिक़:
तफ़्सीर रूहुल बयान से: हज़रत सुलेमान (अलै.) ने बैतुल मुक़द्दस को लाल गंधक से रोशन किया, जो बारह मील दूर से दिखाई देती थी, और मस्जिद को सोने-चाँदी से सजाया।
ये नेक सहाबा और नबी अल्लाह के सबसे प्यारे लोगों में से थे, और मस्जिदों की ताज़ीम में उनकी कोशिशें हिदायत और इबादत की अज़ल मिसालें हैं।
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