Transliteration: (Allazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo fee sabeelil laahi bi amwaalihim wa anfusihim a'zamu darajatan 'indal laah; wa ulaaa'ika humul faaa'izoon)
यह आयत जिहाद की तीन मानी-पहचानी क़िस्में बताती है:
ये तीनों गुट इस आयत में शामिल हैं, लेकिन इसमें आहिस्ता-आहिस्ता यह बताया गया कि मुहाजिरों को अन्सार पर फ़ज़ीलत है, हालाँकि दोनों अल्लाह के प्यारे हैं।
उनकी फ़ज़ीलत सिर्फ़ काफ़िरों पर ही नहीं, बल्कि मोमिनों में भी उन्हें अपनी क़ुर्बानी और वफ़ादारी की वजह से ख़ास बुलंद दर्जा हासिल है।
हज़रत नूह (अलै.) के ज़माने की मिसाल: कश्ती में जानवरों को दाख़िले की इजाज़त मिली, लेकिन काफ़िर को नहीं।
अल्लाह सूरा अल-बय्यिना (98:6) में फ़रमाता है: "बेशक वे (काफ़िर) सारी मख़लूक़ात में सबसे बदतर हैं।"
इसलिए जो ईमान लाए, हिजरत की और सच्चाई से जद्दोजहद की, उन्होंने सबसे बुलंद रूहानी दर्जे हासिल किए और वही सच्चे कामयाब हैं।
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