Transliteration: (Summa yatoobul laahu mim ba'di zaalika 'alaa mai yashaaa'; wallaahu Ghafoorur Raheem)
इस आयत से हम सीखते हैं कि अल्लाह जिसकी चाहता है तौबा क़बूल करता है, जो उसकी लामहदूद रहमत और बख़्शिश को दर्शाता है। ख़ास तौर पर क़बीला हवाज़िन के बाक़ी लोगों को अल्लाह ने इस्लाम की हिदायत दी। वे नबी करीम ﷺ के पास आए और सच्चे दिल से ईमान लाए।
फ़याज़ी और दरगुज़र के तौर पर नबी ﷺ ने उनके क़ैदियों को आज़ाद कर दिया, ख़ास तरह से यह मेहरबानी इसलिए कि वे हलीम सादी की क़ौम से ताल्लुक़ रखते थे — जो सब्र और शराफ़त के लिए जानी जाती थी।
यह आयत अल्लाह की माफ़ी की ख़्वाहिश और सच्ची तौबा की अहमियत पर ज़ोर देती है — यह पैग़ाम देती है कि माज़ी चाहे कैसा भी हो, अल्लाह की रहमत उनके लिए हमेशा हासिल है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करें।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat