कुरान - 9:35 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
يَوۡمَ يُحۡمَىٰ عَلَيۡهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكۡوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمۡ وَجُنُوبُهُمۡ وَظُهُورُهُمۡۖ هَٰذَا مَا كَنَزۡتُمۡ لِأَنفُسِكُمۡ فَذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡنِزُونَ,

Transliteration: (Yawma yuhmaa 'alaihaa fee naari jahannama fatukwaa bihaa jibaahuhum wa junoobuhum wa zuhooruhum haazaa maa kanaztum li anfusikum fazooqoo maa kuntum taknizoon)

जिस दिन उस (सोने-चाँदी) को जहन्नम की आग [87] में तपाया जाएगा, फिर उससे उनकी पेशानियाँ, पहलू और पीठें [88] दाग़ी जाएँगी। (कहा जाएगा:) यह है वह माल जो तुमने अपने लिए जमा किया था [89], तो चखो उस (माल) का अज़ाब जिसे तुम जमा करते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 35 की तफ़्सीर

✅ [87] ख़ज़ानों का सख़्त तपना

ये ख़ज़ाने जहन्नम की आग में इस क़दर तपाए जाएँगे कि वे सफ़ेद हो जाएँगे। (ख़ज़ाइन)

✅ [88] पेशानी, पहलू और पीठ पर दाग़

मालदार बुख़ील लोग ग़रीबों को देखकर माथा टेढ़ा करते थे, फिर उनसे मुँह फेरकर पीठ दिखाते थे। इसलिए तीनों उज़्व — पेशानी, पहलू और पीठ — दाग़े जाएँगे।

✅ [89] जमा-पूँजी और ज़कात की हकीकत

हम सीखते हैं कि अल्लाह की राह के लिए रखा हुआ माल बुरा नहीं माना जाता। अमानत में रखा हुआ माल भी ज़कात से पाक होता है, चाहे वह हज़ारों की तादाद में ही क्यों न हो।

अपने लिए जमा करने में वह माल भी शामिल है जो इंसान अपने बच्चों, रिश्तेदारों आदि के लिए इकट्ठा करता है, जब उसका मक़सद अल्लाह की रज़ा हासिल करना न हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now