Transliteration: (huwal lazeee ar sala Rasoolahoo bilhudaa wa deenil haqqi liyuzhirahoo 'alad deeni kullihee wa law karihal mushrikoon)
यह आयत बताती है कि नबी करीम ﷺ अल्लाही इज़्ज़त का अक्स हैं। अपने ख़ालिक़ को सच्ची पहचान में जानना है, तो पहचानो कि वही रब है जिसने हज़रत मुहम्मद ﷺ को अपना सच्चा रसूल बनाकर भेजा। नबी ﷺ अल्लाह की ज़ात और सिफ़ात का अक्स पेश करते हैं।
सच्चा दीन और हिदायत नबी करीम ﷺ से उसी तरह जुड़े हैं जैसे रोशनी सूरज से जुड़ी होती है। अरबी में "हिदायत" के साथ लगे "बा" हर्फ़ से यह बंदिश ज़ाहिर होती है कि नबी ﷺ की ज़ात और हिदायत अलग नहीं हो सकते।
अल्लाह ने नबी करीम ﷺ के दीन के ज़रिए पहले के तमाम आसमानी दीनों को मंसूख़ कर दिया, और अपने दीन को हर दूसरे दीन पर ग़ालिब किया।
जो नबी करीम ﷺ की अज़मत और इज़्ज़त को नापसंद करता है, वह मुशरिक है, क्योंकि वह इस्लाम की सच्चाई और रसूल के दीनी मिशन के ख़िलाफ़ है।
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