कुरान - 9:38 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَا لَكُمۡ إِذَا قِيلَ لَكُمُ ٱنفِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱثَّاقَلۡتُمۡ إِلَى ٱلۡأَرۡضِۚ أَرَضِيتُم بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا مِنَ ٱلۡأٓخِرَةِۚ فَمَا مَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ,

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo maa lakum izaa qeela lakumun firoo fee sabeelil laahis saaqaltum ilal ard; aradeetum bilhayaatid dunyaa minal Aakhirah; famaamataa'ul hayaatiddunyaa fil Aakhirati illaa qaleel)

ऐ ईमान वालो! तुम्हें क्या हो गया कि जब तुमसे कहा जाए [103] कि अल्लाह की राह में निकलो, तो तुम ज़मीन से चिपके रहते हो [104]? क्या तुमने आख़िरत के मुक़ाबले दुनिया की ज़िंदगी को पसंद कर लिया? तो दुनिया की ज़िंदगी का असबाब आख़िरत के मुक़ाबले में बहुत थोड़ा है [105]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 38 की तफ़्सीर

✅ [103] गुनाह करने से मोमिन काफ़िर नहीं होता

इससे हम सीखते हैं कि गुनाह करने से मुसलमान काफ़िर नहीं हो जाता, क्योंकि अल्लाह उन्हें मोमिन ही कहता है जो जिहाद में सुस्ती दिखाते हैं, हालाँकि जिहाद में कोताही गुनाह है।

✅ [104] शान-ए-नुज़ूल — ग़ज़वा-ए-तबूक

यह आयत ग़ज़वा-ए-तबूक के मौके पर जिहाद का जज़्बा पैदा करने के लिए नाज़िल हुई। यह जंग रजब, 9 हिजरी में ग़ज़वा-ए-ताइफ़ के बाद हुई। तबूक मदीना से शाम की तरफ़ कई किलोमीटर दूर है।

नबी करीम ﷺ ने सख़्त काल और गर्मी के बावजूद बड़ी कोशिश की, जिससे मुसलमानों पर ज़ोर पड़ा।

  • हज़रत उस्मान ग़नी (रज़ि.) ने 10,000 सैनिकों का साज़ो-सामान, 10,000 सोने के सिक्के, 900 ऊँट और 100 ज़ीनदार घोड़े दान किए।
  • हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ि.) ने घर का सब कुछ दे दिया।
  • हज़रत उमर (रज़ि.) ने अपनी आधी जायदाद दान की।

नबी करीम ﷺ ने हज़रत अली मुर्तज़ा (रज़ि.) को मदीना में अपना नायब बनाया और 30,000 की फ़ौज लेकर निकले।

अब्दुल्लाह बिन उबैय और मुनाफ़िक़ सनिय्यतुल वदा पर लौट गए।

तबूक का कुआँ — जिसमें पानी बहुत कम था — नबी ﷺ की मुबारक पानी की बरकत से भर गया, और सैनिकों और जानवरों के लिए काफ़ी हुआ।

असल में कोई जंग नहीं हुई, क्योंकि क़ैसर हिरक़ल मुस्लिम फ़ौज के रौब से दब गया। नबी ﷺ ने दूमतुल जन्दल और ऐला के गवर्नरों से जज़िया लिया और मदीना लौट आए।

इस जंग के बाद हज़रत काब बिन मालिक, हिलाल बिन उमय्यह और मुरारा बिन रबी को (समाज से) अलग कर दिया गया (तफ़्सील आगे आती है)।

✅ [105] दुनियावी लुत्फ़ आरज़ी है

इसका मतलब है कि दुनिया की सब चीज़ें फ़ानी हैं, जबकि आख़िरत दाइमी और वाफ़िर है। इस दुनिया का सामान उसके मुक़ाबले बहुत थोड़ा है।

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