Transliteration: (Wa law araadul khurooja la-'addoo lahoo 'uddatanw wa laakin karihal laahum bi'aasahum fasabbatahum wa qeelaq 'udoo ma'al qaa'ideen)
मुनाफ़िक़ दावा करते थे कि वे ग़ज़वा-ए-तबूक में शामिल होना चाहते थे, लेकिन अचानक बीमारी या मुश्किलात की वजह से रुक गए।
हालाँकि उनका दावा झूठा था, क्योंकि उन्होंने सफ़र के लिए कोई असली कोशिश या तैयारी ही नहीं की थी। उनके दिल शुरू से ही मुतमइन नहीं थे।
इससे हम सीखते हैं कि किसी दीनी या सैन्य फ़र्ज़ की तैयारी करना ख़ुद एक इबादत है, जो सच्चाई और लगन को ज़ाहिर करती है।
यह जुमला ज़ाहिरी तौर पर साथियों, ख़ानदान या शैतान के वसवसे की सलाह जैसा लग सकता है।
लेकिन गहरी समझ से पता चलता है कि यह अल्लाह का अनदेखा इरादा था जो उनके दिलों पर डाला गया, क्योंकि उन्होंने जिहाद में शामिल होने का हुक्म ठुकरा दिया था।
मज़बूत तफ़्सीर यह है कि अल्लाह ने ख़ुद उनके दिलों में यह कसालत डाली, इसलिए "कहा गया" का इस्तेमाल हुआ — ताकि अल्लाही इरादा ज़ाहिर हो।
"बैठ जाओ" का हुक्म पीछे रहने वाले तमाम गिरोहों — औरतें, बुज़ुर्ग, बच्चे और बीमार — को शामिल करता है।
इस तरह मुनाफ़िक़ों को उन्हीं लोगों की क़िस्म में डालकर रुसवा किया गया जो सच्चे तौर पर माफ़ी के हक़दार थे — बावजूद इसके कि वे ख़ुद को क़ाबिल जताते थे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat