कुरान - 9:47 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
لَوۡ خَرَجُواْ فِيكُم مَّا زَادُوكُمۡ إِلَّا خَبَالٗا وَلَأَوۡضَعُواْ خِلَٰلَكُمۡ يَبۡغُونَكُمُ ٱلۡفِتۡنَةَ وَفِيكُمۡ سَمَّـٰعُونَ لَهُمۡۗ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ,

Transliteration: (Law kharajoo feekum maa zaadookum illaa Khabaalanw wa la awda'oo khilaalakum yabghoona kumul fitnata wa feekum sammaa'oona lahum; wallaahu 'aleemum biz zaalimeen)

अगर वे तुम्हारे साथ निकलते, तो तुममें फ़साद [135] के सिवा कुछ और न बढ़ाते, और तुम्हारे बीच फ़ित्ना की तलाश में दौड़-धूप करते — तुम्हारे (हालात पर) जासूसी करते हुए [136]। और अल्लाह ज़ालिमों को अच्छी तरह जानता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 47 की तफ़्सीर

✅ [135] मुनाफ़िक़ फ़साद फैलाते हैं, मदद नहीं

अगर मुनाफ़िक़ जंग में मुसलमानों के साथ शामिल होते, तो वे कोई फ़ायदा नहीं — सिर्फ़ फ़ित्ना और फ़साद लाते।

वे ऐसा करते:

  • काफ़िरों की ताक़त की तारीफ़ करके मुसलमानों को डराते।
  • मुसलमानों को आपस में लड़ाने की कोशिश करते।
  • खुले तौर पर दुश्मनों की तारीफ़ करते और मोमिनों की बेइज़्ज़ती करते।

यह दिखाता है कि बुरी नियत से किया गया अच्छा काम भी नुक़सान का सबब बनता है। मिसाल के तौर पर मुनाफ़िक़ का सिर्फ़ जूते चुराने के लिए मस्जिद जाना — बाहरी नेकी और अंदरूनी बुराई का यही तज़ाद दिखाता है।

✅ [136] मुनाफ़िक़ जासूसी और फ़ित्ना फैलाते हैं

ये मुनाफ़िक़ मुसलमानों की बातचीत चुपके से सुनकर दुश्मनों तक पहुँचाते थे, यानी जासूसी और सूचना का काम करते थे।

यह आयत सिखाती है:

  • जो मोमिन अंदरूनी मामले लीक करके मुनाफ़िक़ों का औज़ार बनता है, वह भी निफ़ाक़ की निशानियाँ दिखाता है।
  • "उनकी जासूसी" से दो क़िस्में मुराद हो सकती हैं: काफ़िरों को ख़बरें पहुँचाने वाले मुनाफ़िक़, और सादे दिल नए मुसलमान जो मुनाफ़िक़ों के जाल में फँसकर अनजाने में फ़ित्ना फैलाते हैं।

यह आयत दोहरे मापदंड, कमज़ोर ईमान और छिपे मक़सद वालों पर आँख बंद करके भरोसा करने के ख़तरे से आगाह करती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now