Transliteration: (Wa minhum mai yaqoolu' zal lee wa laa taftinneee; alaa fil fitnati saqatoo; wa inna Jahannama lamuheetatum bil kaafireen)
नबी करीम ﷺ ने मुनाफ़िक़ जद बिन क़ैस को ग़ज़वा-ए-तबूक की तैयारी का हुक्म दिया।
जद बिन क़ैस ने जवाब दिया कि उसकी क़ौम जानती है कि वह औरतों के बारे में कितना जज़्बाती है, और अगर वह रोमियों से जंग करने गया तो उसे डर है कि उनकी ख़ूबसूरत औरतों की तरफ़ माइल हो जाएगा, जिससे उसे मुश्किल पेश आ सकती है।
उसने कहा कि उसे फ़ित्ने और आज़माइश में पड़ने से बचाने के लिए साथ न लिया जाए। इस झूठे बहाने के जवाब में यह आयत नाज़िल हुई।
जंग में शामिल न होना, नबी ﷺ के हुक्म की नाफ़रमानी करना और उनका मज़ाक उड़ाना — ये सब गंभीर फ़ित्ने हैं।
यह दिखाता है कि उनका बहाना ख़ुद एक फ़ित्ना और नाफ़रमानी थी।
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