कुरान - 9:51 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
قُل لَّن يُصِيبَنَآ إِلَّا مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَنَا هُوَ مَوۡلَىٰنَاۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ,

Transliteration: (Qul lany-yuseebanaaa illaa maa katabal laahu lanaa Huwa mawlaanaa; wa 'alal laahi fal yatawakka lil mu'minoon)

(ऐ नबी ﷺ) कह दीजिए: हमें वही पहुँचता है जो अल्लाह ने हमारे लिए मुक़र्रर किया है [145]। वही हमारा मालिक है, और मोमिनों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 51 की तफ़्सीर

✅ [145] अल्लाही तक़दीर और अल्लाह पर भरोसा

"हमें वही पहुँचता है जो अल्लाह ने हमारे लिए मुक़र्रर किया है" का मतलब है कि सारे हादसात — चाहे ग़म हो या आसाइश — सिर्फ़ अल्लाह की मर्ज़ी और हिकमत से होते हैं।

अगर "लिए" (for) से फ़ायदे का इशारा हो, तो इसका मतलब यह है कि जो कुछ हमें पहुँचता है, वह आख़िर में हमारे ही भले के लिए होता है — चाहे हमें फ़ौरन समझ आए या न आए।

यह आयत मोमिनों को तरग़ीब देती है कि वे सिर्फ़ अल्लाह पर पूरा भरोसा करें, उसे ही अपना असल मालिक और मामलात का क़ाबू रखने वाला समझें।

मोमिनों को याद दिलाया जाता है कि हर हाल में अल्लाह के फ़ैसले पर डटे रहें और उस पर राज़ी रहें।

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