Transliteration: (Qul hal tarabbasoona binaaa illaaa ihdal husnayayni wa nahnu natrabbasu bikum ai yus eebakumul laahu bi'azaa bim min 'indiheee aw biaidee naa fatarabbasooo innaa ma'akum mutarabbisoon)
मुनाफ़िक़ हमारे बारे में दो चीज़ों में से एक का इंतज़ार करते हैं: भलाई या शहादत।
यह दिखाता है कि मोमिन के लिए मुसीबत भी अल्लाह की रहमत है, क्योंकि आज़माइशों में सब्र करने पर बड़ा सवाब मिलता है।
शहादत की कई क़िस्में हैं:
हर हाल में मोमिन रूहानी तौर पर नफ़ा उठाता है।
"अपनी तरफ़ से अज़ाब" से मुराद अल्लाह का बराह-ए-रास्त अज़ाब है, जैसे कुफ़्र की हालत में मौत और फिर क़ब्र व आख़िरत का अज़ाब।
कुछ विद्वान इसे उन अज़ाबों से समझाते हैं जो पुरानी क़ौमों — जैसे समूद और आद — पर आए, यानी अनजाने या ग़ैर-मामूली ज़रियों से आने वाले सज़ा के वाक़यात।
इनमें जिस्म की सूरत बिगाड़ना (मस्ख़) या ज़मीन में धँसाना (ख़स्फ़) जैसी क़िस्में शामिल हैं। नबी ﷺ के ज़माने से ये आम अज़ाब बंद हो गए, लेकिन क़ियामत से पहले इनकी ख़ास सूरतें आ सकती हैं।
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