कुरान - 9:55 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
فَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَلَآ أَوۡلَٰدُهُمۡۚ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمۡ وَهُمۡ كَٰفِرُونَ,

Transliteration: (Falaa tu'jibka amwaaluhum wa laaa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu liyu'az zibahum bihaa fil hayaatid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon)

तो उनके माल और औलाद तुम्हें आज़माइश में न डालें। अल्लाह तो बस यही चाहता है कि दुनिया की ज़िंदगी में इन चीज़ों के ज़रिए उन्हें अज़ाब [153] दे, और उनकी जानें इस हालत में निकलें कि वे काफ़िर हों [154]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 55 की तफ़्सीर

✅ [152] मुनाफ़िक़ों के माल पर नज़रें न डालो

मुसलमानों को आगाह किया गया कि मुनाफ़िक़ों के माल और नेमतों को देखकर हैरान न हों।

हालाँकि वे ज़ाहिरी तौर पर कामयाब दिखते हैं, नबी करीम ﷺ की नज़र में उनका माल बेहद हक़ीर था — "मच्छर के पंख से भी कम।"

✅ [153] माल अज़ाब का ज़रिया

मेहनत से माल जमा करना, उसकी सख़्ती से हिफ़ाज़त करना, और फिर पछतावे के साथ उसे छोड़कर मर जाना — यह ख़ुद अल्लाह की तरफ़ से एक सज़ा है।

माली कामयाबी अल्लाह की क़ुबूलियत या कामयाबी की ज़मानत नहीं देती।

✅ [154] औलाद और माल जो अल्लाह से ग़ाफ़िल कर दें

अगर माल या औलाद इंसान को अल्लाह से ग़ाफ़िल कर दें, तो यह अज़ाब की एक सूरत है।

मालदारों को अक्सर दर्दनाक मौत का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें दुनिया और माल — दोनों छोड़ने का दोहरा दर्द झेलना पड़ता है।

इसके उलट, मोमिन की मौत आसान होती है और उसे नबी ﷺ से मिलने की ख़ुशी माना जाता है, जिसे "उर्स" कहा जाता है — दुल्हे (नबी ﷺ) से मुलाक़ात का शादी का दिन।

मौत उस ट्रेन जैसी है जो मुजरिमों को सज़ा तक ले जाती है, जबकि मोमिनों के लिए वह जश्न और अल्लाह से मुलाक़ात का ज़रिया है।

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