कुरान - 9:57 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
لَوۡ يَجِدُونَ مَلۡجَـًٔا أَوۡ مَغَٰرَٰتٍ أَوۡ مُدَّخَلٗا لَّوَلَّوۡاْ إِلَيۡهِ وَهُمۡ يَجۡمَحُونَ,

Transliteration: (Law yajidoona malja'an aw maghaaraatin aw mudda khalal lawallaw ilaihi wa hum yajmahoon)

अगर वे कोई पनाह की जगह, या ग़ार, या घुसने की जगह पा लें, तो वे उसी तरफ़ दौड़ पड़ें [156]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 57 की तफ़्सीर

✅ [156] मुनाफ़िक़ों की भागने की ख्वाहिश

यह आयत बताती है कि मुनाफ़िक़ मौका पाकर मोमिनों से भागने के लिए कितने बेचैन रहते हैं, और किसी भी छिपने की जगह या पनाह की तरफ़ सरपट दौड़ते हैं।

इससे हम सीखते हैं कि सच्चे मोमिनों के बीच मुनाफ़िक़ वैसे ही अजनबी है जैसे तोतों के बीच कौआ — वह इस समाज से बुनियादी तौर पर अलग और पराया है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now