कुरान - 9:56 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ إِنَّهُمۡ لَمِنكُمۡ وَمَا هُم مِّنكُمۡ وَلَٰكِنَّهُمۡ قَوۡمٞ يَفۡرَقُونَ,

Transliteration: (Wa yahlifoona billaahi innnahum laminkum wa maa hum minkum wa laakinnahum qawmuny yafraqoon)

और वे अल्लाह की क़समें खाते हैं कि वे यक़ीनन तुममें से हैं, हालाँकि वे तुममें से नहीं। लेकिन वे ऐसे लोग हैं जो डरते [155] हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 56 की तफ़्सीर

✅ [155] झूठी क़समें और मुनाफ़िक़ों का ख़ौफ़

मुनाफ़िक़ अल्लाह की क़समें खाकर दावा करते हैं कि वे मुसलमानों में से हैं, जबकि हक़ीक़त में वे उनमें से नहीं हैं।

यह झूठा दावा उनके ख़ौफ़ की वजह से है — उन्हें डर है कि अगर उनका निफ़ाक़ ज़ाहिर हुआ तो उनकी जान, माल और इज़्ज़त ख़तरे में पड़ जाएगी, या मुसलमानों की ताक़त से उन्हें नुक़सान पहुँचेगा।

यह आयत मुनाफ़िक़ों के डर और बेबुनियाद दावों को ज़ाहिर करती है, और मोमिनों को उनकी झूठी क़समों से चौकन्ना रहने की हिदायत देती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now