कुरान - 9:59 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَلَوۡ أَنَّهُمۡ رَضُواْ مَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَقَالُواْ حَسۡبُنَا ٱللَّهُ سَيُؤۡتِينَا ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ وَرَسُولُهُۥٓ إِنَّآ إِلَى ٱللَّهِ رَٰغِبُونَ,

Transliteration: (Wa law annahum radoo maaa aataahumul laahu wa Rasooluhoo wa qaaloo hasbunal laahu sayu'teenallaahu min fadlihee wa Rasooluhooo innaaa ilallaahi raaghiboon)

और अगर वे उस पर राज़ी रहते [159] जो अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें दिया, और कहते: हमारे लिए अल्लाह ही काफ़ी है [160]। अल्लाह हमें अपने फ़ज़ल से देगा [161] और उसका रसूल भी। हम सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ ही रग़बत रखते हैं — (तो उनके लिए बेहतर होता)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 59 की तफ़्सीर

✅ [159] अल्लाही और नबवी अता पर राज़ी रहना

इससे हम सीखते हैं कि अल्लाह और उसके महबूब नबी ﷺ की दी हुई नेमतों और ईमान पर राज़ी रहना बिल्कुल दुरुस्त है। अल्लाह ने मोमिनों को जहन्नम से बचाया है और उन पर लगातार नेमतें नाज़िल करता है, अक्सर नबी करीम ﷺ के ज़रिए।

✅ [160] अल्लाह की नेमतों की काफ़ी होना

चाहे दुनियावी माल मिले या न मिले, अल्लाह की नेमतें और बरकतें ही काफ़ी हैं। यह यक़ीन सच्चे मोमिन के दिल की निशानी है।

✅ [161] नबी ﷺ के ज़रिए नेमतों की तक़सीम

यहाँ जिन नेमतों का ज़िक्र है, वे सब नबी करीम ﷺ के ज़रिए तक़सीम होती हैं — यह अल्लाह और उसके रसूल के नेमतें देने में जुड़े हुए रोल को दर्शाता है, जो बग़ैर किसी हद के है।

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