Transliteration: (Yahlifoona billaahi lakum liyurdookum wallaahu wa Rasooluhoo ahaqqu ai yurdoohu in kaanoo mu'mineen)
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों के बारे में है जो पीठ पीछे इस्लाम और मुसलमानों का मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन सामने आकर वफ़ादारी का दिखावा करते थे। जब सामना होता तो वे अल्लाह की झूठी क़समें खाकर बेगुनाही का दावा करते, ताकि मोमिनों को राज़ी कर सकें और अपनी इज़्ज़त बचा सकें।
ये क़समें सच्ची नहीं, बल्कि धोखे की चालें थीं, जिनका मक़सद मुस्लिम समाज में क़बूलियत बरक़रार रखना था। आयत उनके दोहरे चेहरे को उजागर करती है और ऐसे सतही दिखावे से मोमिनों को आगाह करती है।
इस आयत से हम दो अहम उसूल सीखते हैं:
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