Transliteration: (Yahzarul munaafiqoona an tunaz zala 'alaihim Sooratun tunabbi 'uhum bimaa feequloobihim; qulistahzi'oo innal laaha mukhrijum maa tahzaroon)
इस आयत के ज़मीर (सर्वनाम) पर ग़ौर कीजिए: "उन्हें" और "उन्हें बताने" का इशारा मुसलमानों की तरफ़ है, जबकि "उनके दिलों में" से मुनाफ़िक़ मुराद हैं। इससे हम तीन बातें सीखते हैं:
यहाँ मुनाफ़िक़ों को तंज़ के तौर पर मज़ाक जारी रखने के लिए कहा गया है, लेकिन यह इजाज़त नहीं — बल्कि अल्लाही सरज़निश (फटकार) है। जब दीनी अहकाम या अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से जुड़े मामलों का ताल्लुक़ हो, तो मज़ाक उड़ाना सख़्त गुनाह है।
यह बयान मुनाफ़िक़ों को झिड़कने और आगाह करने के लिए है, उनके रवैये को माफ़ करने के लिए नहीं।
अल्लाह ने यक़ीनन यह चेतावनी पूरी की। मुनाफ़िक़ जिस चीज़ से डरते थे — कि उनके अंदरूनी राज़ ज़ाहिर हो जाएँ — वह सामने आ गई।
कुरआन की आयतों के ज़रिए वे रुसवा हुए, जिससे अल्लाह का यह वादा पूरा हुआ कि वह हक़ ज़ाहिर करेगा और उनका झूठ खोलेगा।
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