Transliteration: (Wala'in sa altahum layaqoolunna innamaa kunnaa nakhoodu wa nal'ab; qul abillaahi wa 'Aayaatihee wa Rasoolihee kuntum tastahzi'oon)
यह आयत ग़ज़वा-ए-तबूक के सफ़र के दौरान नाज़िल हुई। दो मुनाफ़िक़ों ने खुले तौर पर रोमियों पर मुसलमानों की फतह पर शक किया और नबी करीम ﷺ का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि उनकी फतह का अंदाज़ा हक़ीक़त से दूर है। उनमें से एक तीसरा आदमी, हालाँकि बोला नहीं, उनके साथ हँस दिया।
जब नबी ﷺ ने तीनों को बुलाकर स्पष्टीकरण माँगा, तो उन्होंने यह कहकर निफ़ाक़ छुपाने की कोशिश की कि हम तो सफ़र की एकरसता दूर करने के लिए मज़ाक कर रहे थे। इस बहाने के जवाब में अल्लाह ने यह सख़्त आयत नाज़िल की।
इस वाक़ये से अहम सबक़:
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