कुरान - 9:74 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ مَا قَالُواْ وَلَقَدۡ قَالُواْ كَلِمَةَ ٱلۡكُفۡرِ وَكَفَرُواْ بَعۡدَ إِسۡلَٰمِهِمۡ وَهَمُّواْ بِمَا لَمۡ يَنَالُواْۚ وَمَا نَقَمُوٓاْ إِلَّآ أَنۡ أَغۡنَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ مِن فَضۡلِهِۦۚ فَإِن يَتُوبُواْ يَكُ خَيۡرٗا لَّهُمۡۖ وَإِن يَتَوَلَّوۡاْ يُعَذِّبۡهُمُ ٱللَّهُ عَذَابًا أَلِيمٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۚ وَمَا لَهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ,

Transliteration: (Yahlifoona billaahi ma qaaloo wa laqad qaaloo kalimatal kufri wa kafaroo ba'da Islaamihim wa hammoo bimaa lam yanaaloo; wa maa naqamooo illaaa an aghnaa humullaahu wa Rasooluhoo min fadlih; fainy yatooboo yaku khairal lahum wa iny yatawal law yu'az zibhumullaahu 'azaaban aleeman fiddunyaa wal Aakhirah; wamaa lahum fil ardi minw waliyyinw wa laa naseer)

वे अल्लाह की क़समें खाते हैं कि उन्होंने नहीं कहा, जबकि यक़ीनन उन्होंने कुफ़्र का कलाम [207] कहा, और इस्लाम क़बूल करने के बाद काफ़िर हो गए। और उन्होंने वह चाहा जो उन्हें न मिला [208]। और उन्हें सिर्फ़ इस बात पर बुरा लगा कि अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें अपने फ़ज़ल से मालदार [209] कर दिया। तो अगर वे तौबा कर लें तो उनके लिए बेहतर है, और अगर मुँह मोड़ें तो अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में सख़्त अज़ाब देगा। और ज़मीन में उनका न कोई हिमायती होगा न मददगार [210]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 74 की तफ़्सीर

✅ [207] शान-ए-नुज़ूल

  • ग़ज़वा-ए-तबूक के दौरान जल्लास नामक शख़्स ने नबी ﷺ के बारे में एक बेअदबाना बात कहने से इनकार किया और हज़रत आमिर बिन क़ैस पर झूठ का इल्ज़ाम लगाया।
  • अल्लाह ने आमिर के क़ौल की सच्चाई साबित करने के लिए यह आयत नाज़िल की।
  • जल्लास बाद में तौबा करके सच्चा मोमिन बन गया। (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)

✅ [208] कुफ़्र के कलाम

  • मुनाफ़िक़ों ने शक और कुफ़्र के अल्फ़ाज़ कहे, और नबी ﷺ के पैग़ाम पर "अगर-मगर" किया।
  • ऐसा रवैया कुफ़्र की निशानी माना गया।

✅ [209] ज़ाहिरी और अंदरूनी कुफ़्र

  • ज़ाहिरी तौर पर इस्लाम क़बूल करने के बाद कुछ लोग ज़ाहिरी तौर पर भी काफ़िर हो गए, जो निफ़ाक़ दिखाता है।
  • जल्लास ने आमिर (रज़ि.) को क़त्ल करने की कोशिश भी की, लेकिन नाकाम रहा।

✅ [210] अल्लाह और रसूल का मालदार बनाना

  • यहाँ "उसके" (His) का ज़मीर रसूल ﷺ की तरफ़ है, जो बताता है: नबी करीम ﷺ ख़ुद इतने मालदार हैं कि दूसरों को मालदार कर सकते हैं।
  • जो उन्हें ग़रीब कहे, वह सख़्त बेअदबी और कुफ़्र करता है।
  • अल्लाह और उसके रसूल फ़ज़ल से नेमतें देते हैं।
  • कुछ नाफ़रमान अल्लाह और रसूल की नेमतों के बावजूद सरकश हो जाते हैं।
  • "अल्लाह और उसका रसूल नेमतें देते हैं" कहना बिल्कुल दुरुस्त है।
  • काफ़िर और मुनाफ़िक़ सारे दोस्त और मददगार खो देते हैं, जबकि अल्लाह मोमिनों के लिए मददगार मुक़र्रर करता है।
  • "तुम्हारा दोस्त सिर्फ़ अल्लाह, उसका रसूल और मोमिन हैं" (सूरा माइदा 5:55)।

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