कुरान - 9:73 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ جَٰهِدِ ٱلۡكُفَّارَ وَٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱغۡلُظۡ عَلَيۡهِمۡۚ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ,

Transliteration: (Yaaa aiyuhan Nabiyyu jaahidil kuffaara walmunaafiqeena waghluz 'alaihim; wa maawaahum jahannnamu wa bi'sal maseer)

ऐ नबी! ग़ैब की ख़बरें बताने वाले [204]! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करो और उन पर सख़्ती [205] करो। उनका ठिकाना जहन्नम है, और वह बहुत बुरा ठिकाना [206] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 73 की तफ़्सीर

✅ [204] नबी ﷺ को ख़िताबों से ताज़ीम देना

  • इससे हम सीखते हैं कि नबी करीम ﷺ को नाम से नहीं, बल्कि ख़ूबसूरत ख़िताबों से पुकारना चाहिए।
  • जब अल्लाह ख़ुद उन्हें नाम से नहीं पुकारता, तो हम किस हक़ से नाम से पुकारें? इस आयत में अल्लाह ने उन्हें "ग़ैब की ख़बरें बताने वाला" का ख़िताब दिया।
  • अल्लाह फ़रमाता है: "अपने बीच रसूल के बुलाने को ऐसा न बनाओ जैसे तुम आपस में एक-दूसरे को बुलाते हो" (सूरा नूर 24:63) — यह ताज़ीम और अदब सिखाता है।

✅ [205] काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद

  • यहाँ "काफ़िर" से मुराद जंग करने वाले काफ़िर हैं। काफ़िरों से जंग तलवार से होती है।
  • मुनाफ़िक़ों के साथ रवैया सख़्त लफ़्ज़ों और मज़बूत दलीलों से होता है।
  • मोमिन की पहचान यह है कि वह मोमिनों के साथ नरम और काफ़िरों के साथ सख़्त हो। अल्लाह हमें यह नसीब करे।
  • इस आयत से काफ़िरों पर नरमी दिखाने वाली पहले की आयतें मंसूख़ हो जाती हैं। (रूहुल बयान)

✅ [206] आख़िरत में बराबरी

  • खुले और मशहूर काफ़िर और मुनाफ़िक़ जहन्नम के मुस्तहिक़ होने में बराबर हैं, हालाँकि दुनिया में उन पर लागू क़वानीन अलग होते हैं।

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